CBSE Std 8 Hindi विद्वान और व्यापारी (vidvan or vyapari) – questions-answers

Hindi (CBSE)

विद्वान और व्यापारी

  • स्मृति पिटारा (questions answers)

१) शंभूनारायण अपने छोटे को व्यंग्य से क्या कहकर पुकारता था?
उतर – शंभूनारायण अपने छोटे को व्यंग्य से “ललते” कहकर पुकारता था।

२) ललितनारायण घर छोड़कर क्यों चला गया ?
उतर – ललितनारायण को पढ़-लिखकर विद्वान बनना था ,पर इसके कारण उसके भाई और पिता के साथ ज़गडा होता रहता था । शंभूनारायण उसकी पढ़ाई को पैसे वाले की ऐयाशी समज़ते थे। इसलिए ललितनारायण ने घर से कुछ भी न लेने की ठान ली और घर छोड़ दिया।

३) शंभूनारायण ललितनारायण को “तू है अंधा” क्यों कहा है ? ललितनारायण ने इसके संदर्भ में क्या स्पष्टीकरण दिया ?
उतर – शंभूनारायण ललितनारायण को “तू है अंधा” कहा है क्योंकि ललितनारायण देख नहीं रहे थे की उसके बापू बीमार है और दुकान भी ठीक से चल नहीं रही है। इसके स्पष्टीकरण में ललितनारायण ने कहा की मैं अँधा नहीं हूँ भैया। दुकानदारी में मेरा मन नहीं लगता है। मुझे तो पढ़ना है ,पढ़ते ही रहना है।

४) चंदनलाल और करोड़ीमल क्या कहकर शंभूनारायण को कर्ज़ देने से मना कर देते हैं ? इससे शंभूनारायण को क्या सबक मिला ?
उतर – जब शंभूनारायण ने चंदनलाल और करोड़ीमल से पैसा मांगा तब चंदनलाल ने खा की “आजकल बड़ी मंदी चल रही है। इस जमाने में गुजरा करना मुश्किल हो गया है। ” और करोड़ीमल ने कहा की “जान ले-ले मेरी पर कर्जा नहीं। कर्जा तो प्रेम की कैंची है। अपने ससुराल से मांग ले।” इससे शंभूनारायण को सबक मिला की बिगड़ी में कोई साथ नहीं देता।

५) नाटक के पात्र ललितनारायण ने किस प्रकार के रोग में विशेषज्ञता प्राप्त की ?
उतर – नाटक के पात्र ललितनारायण ने मानसिक रोग में विशेषज्ञता प्राप्त की।

 

 

६) किसने कहा ,किससे कहा और क्यों कहा ?

क) “विद्वानी से रोटी नहीं मिलती पगले। विद्वान तो टके के दो मिलते हैं ललते। पैसा कमाने की सोच , पैसा कमाने की।”
उतर – यह वाक्य शंभूनारायण ने ललितनारायण को कहा क्योंकि शंभूनारायण पैसे कमाने के बजाय विद्वान बनना चाहता था।

ख) “विद्या का यों अपमान मत कर बेटे। दिमाग में पड़े चार अक्षर काम आवे हैं , पैसा धोखा दे जावे है। “
उतर – यह वाक्य शंभूनारायण की माँ ने शंभूनारायण को कहा क्योंकि वो शंभूनारायण को समझाना चाहती थी कि पढ़ाई-लिखाई काम आती है और पैसा कभी भी धोखा दे सकता है।

ग) “इसलिए तो मै सोचता था ,वह धन प्राप्त करुँ , जिसे न आग जला सकती है ,न चोर चुरा सकता है , न डाकू लूट सकता है। तुम्हारे पास जल जाने वाली संपति थी , जल गई। “
उतर – यह वाक्य ललितनारायण ने शंभूनारायण को कहा क्योंकि आखिर में विद्वानी ही काम आई जिसे कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकता और पैसा कभी भी साथ छोड़ देता है।

७) निम्नलिखित कथनों का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए –

क) “कर्ज तो प्रेम की कैंची है।”
उतर – इस कथन का उपयोग करके करोड़ीमल शंभूनारायण को बताते है कि तू जान मांग ले पर कभी भी कर्जा मत माँगना। कर्ज से प्रेम-संबंध टूट जाते है। पैसा रिश्ते की दीवार बन जाता है। कर्ज़ प्रेम में एक कैंची समान कार्य करता है।

ख) “इज्जत – सम्मान धनवान का नहीं , विद्वान का भी तो होता है बापू।”
उतर – ललितनारायण उसके बापू को समझाते हुए कहते है कि ऐसा नहीं कि सम्मान और इज्जत सिर्फ पैसे वालो को ही नहीं मिलते। विद्वान लोगो को भी बहुत सम्मान और इज्जत मिल सकती है।

८) चंदनलाल जब शंभूनारायण को बैंक से कर्ज़ लेने का सुझाव देता है तो वह कहता है , “बहुत लंबा चककर है यार। कब दादा मरेगा ,कब पोता बरतेगा।” उसके इस कथन में प्रयुक्त कहावत को रेखंकित कर उसका अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उतर – इस कथन में “कब दादा मरेगा ,कब पोता बरतेगा।” इस कहावत का उपयोग हुआ है। इसका अर्थ है कि दादा के मरने के बाद पोते को मिलने तक जितना इंतज़ार करना पड़ता है और जितना समय लगता है उतना ही अधिक समय बैंक से पैसा लेने के लिए बहुत सारे चक्कर काटने में लगता है और बहुतसारा इंतज़ार भी करना पड़ता है ।

 

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