CBSE Class 8 Hindi “अलंकार” (alankar) अभ्यास questions-answers

अलंकार

१) उचित विकल्प पर सही का निशान लगाइए –

क) अलंकार से अभिप्राय है –
i ) किसी वस्तु ,व्यक्ति या स्थान का नाम
ii ) काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्व
iii ) उपमेय-उपमान में समानता दर्शाने वाला गुण

उतर – ii ) काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्व

ख) अनुप्रास अलंकार वहाँ होता है जहाँ
i ) काव्य-पंक्ति में किसी वर्ण की आवृति बार-बार हो
ii ) काव्य-पंक्ति में किसी वर्ण की आवृति बार-बार न हो
iii ) काव्य-पंक्ति में किसी शब्द की आवृति बार-बार हो

उतर – i ) काव्य-पंक्ति में किसी वर्ण की आवृति बार-बार हो

ग) उपमा अलंकार वहाँ होता है जहाँ
i ) उपमेय पर उपमान का आरोप किया गया हो
ii ) जहाँ दो वस्तुओं की आकृति व गुण आदि भिन्न होने पर भी उनमे असमानता दिखाई जाए।
iii ) जहाँ दो वस्तुओं की आकृति व गुण आदि भिन्न होने पर भी उनमें समानता दिखाई जाए।

उतर – iii ) जहाँ दो वस्तुओं की आकृति व गुण आदि भिन्न होने पर भी उनमें समानता दिखाई जाए।

घ) यमक अलंकार वहाँ होता है जहाँ

i ) काव्य-पंक्ति में किसी एक ही शब्द की आवृति बार-बार हो पर हर बार उसका अर्थ समान हो।
ii ) काव्य-पंक्ति में किसी एक ही शब्द की आवृति बार-बार हो पर हर बार उसका अर्थ भिन्न हो।
iii ) एक शब्द में एकाधिक अर्थ निहित हों।

उतर – ii ) काव्य-पंक्ति में किसी एक ही शब्द की आवृति बार-बार हो पर हर बार उसका अर्थ भिन्न हो।

ङ) श्लेष अलंकार वहाँ होता है जहाँ
i ) किसी काव्य-पंक्ति में एक शब्द के एक से अधिक अर्थ निकलते हों।
ii ) एक ही शब्द की आवृति बार-बार हो।
iii ) एक शब्द के कई अर्थ न हों।

उतर – i ) किसी काव्य-पंक्ति में एक शब्द के एक से अधिक अर्थ निकलते हों।

च) रूपक अलंकार वहाँ होता है जहाँ
i ) उपमेय पर उपमान का आरोप किया जाता है।
ii ) उपमेय को उपमान के समान बताया जाता है।
iii ) उपमेय-उपमान में समानता दर्शाने वाला गन बताया जाए।

उतर – i ) उपमेय पर उपमान का आरोप किया जाता है।

छ) अतिशयोक्ति अलंकार वहाँ होता है जहाँ
i ) किसी वस्तु ,व्यक्ति आदि के बारे में बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है।
ii ) क्रिया संपूर्ण होने से पहले ही कार्य के हो जाने का वर्णन होता है।
iii ) उपर्युक्त दोनों होते है।

उतर – iii ) उपर्युक्त दोनों होते है।

ज) उपमा अलंकार के कुल अंग है –
i ) पाँच
ii ) चार
iii ) तीन

उतर – ii ) चार

झ) उपमा अलंकार के अंग ‘साधारण धर्म ‘ से अभिप्राय है
i ) समानता बताने वाला शब्द।
ii ) उपमेय-उपमान में समानता दर्शाने वाला गुण।
iii ) वह वस्तु,व्यक्ति जिसकी समानता बताई जा रही है।

उतर – ii ) उपमेय-उपमान में समानता दर्शाने वाला गुण।

ञ) उपमा अलंकार के अंग ‘उपमेय’ से अभिप्राय है
i ) वह वस्तु,व्यक्ति जिससे समानता बताई जा रही है।
ii ) वह वस्तु,व्यक्ति जिसकी विशेषता बताई जा रही है।
iii ) वह वस्तु,व्यक्ति जिसकी समानता बताई जा रही है।

उतर – iii ) वह वस्तु,व्यक्ति जिसकी समानता बताई जा रही है।

ट) उपमा अलंकार के अंग ‘उपमान’ से अभिप्राय है
i ) वह वस्तु,व्यक्ति जिससे समानता बताई जा रही है।
ii ) समानता दर्शाने वाला गुण।
iii ) वह वस्तु,व्यक्ति जिसकी समानता बताई जा रही है।

उतर – i ) वह वस्तु,व्यक्ति जिससे समानता बताई जा रही है।

२) शब्दालंकार के तीन भेदों के नाम उदाहरण सहित लिखिए।
उतर –

i ) अनुप्रास अलंकार
­ उदाहरण – रघुपति राघव राजा राम। पतित पावन सीता राम।
ii ) यमक अलंकार
उदाहरण – काली घटा का घमंड घटा।
iii ) श्लेष अलंकार
उदाहरण – जो रहीम गति दीप की , कुल कपूत गति सोय।
बारे उजियारो करे , बढ़े अँधेरो होय।।

३) अर्थालंकार के तीन भेदों के नाम उदाहरण सहित लिखिए।
उतर –

i ) उपमा अलंकार
उदाहरण – पीपर पात सरिस मन डोला।
ii ) रूपक अलंकार
उदाहरण – मैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहों।
iii ) अतिशयोक्ति अलंकार
उदाहरण – हनुमान की पूँछ में , लगन न पाई आग।
लंका सिगरी जल गई ,गए निसाचर भाग।

४) यमक व श्लेष अलंकार में मुख्य अंतर क्या है ?
यमक अलंकार में एक ही शब्द की आवृति बार-बार होती पर हर बार उसका अर्थ भिन्न होता है। जैसे – काली घटा का घमंड घटा।
श्लेष अलंकार में एक ही शब्द के अधिक अर्थ निकलते है। जैसे – बारे उजियारो करे , बढ़े अँधेरो होय।

५) उपमा व रूपक अलंकार में मुख्य अंतर क्या है ?
उपमा अलंकार में दो भिन्न वस्तु,व्यक्ति आदि की समानता दिखाई जाती है। जैसे – पीपर पात सरिस मन डोला।
रूपक अलंकार में दो भिन्न वस्तु की समानता न दिखाकर उपमेय को उपमान का आरोप ही कर दिया जाता है। जैसे – मैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहौं।

६) उपमा अलंकार के चार अंग कौन-से है ? उदाहरणसहित बताइए।
उपमा अलंकार का उदाहरण – पीपर पात सरिस मन डोला।
उपमा अलंकार के चार अंग –
उपमेय – मन
उपमान – पीपर पात
वाचक शब्द – सरिस
साधारण धर्म – डोला

७) निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों में रंगीन अंशों में प्रयुक्त अलंकार का नाम लिखिए –

क) मुदित महीपति मंदिर आए। सेवक सचिव सुमंत बुलाए।
अनुप्रास
ख) धूप -सा तन दीप -सी मै।
उपमा
ग) वर दे , वीणा वादिनी वर दे।
अनुप्रास
घ) मुख बल रवि सम लाल होकर।
उपमा
ङ) चरण-कमल बंदौ हरिराई।
रूपक
च) हाय ! फूल-सी कोमल बच्ची।
उपमा
छ) मधुर मधुर मेरे दीपक जल।
अनुप्रास
ज) सोयी थी तू स्वप्न नीड में।
श्लेष
झ) स्नेह-हीन तारों के दीपक
उपमा
ञ) तीन बेर खाती थी,वो तीन बेर खाती है।
यमक
ट) मेरे मानस के मोती।
उपमा

८) निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों के नाम लिखिए –
  • क) हनुमान की पूँछ में ,लगन न पाई आग।
    लंका सिगरी जल गई , गए निसाचर भाग।
    अतिशयोक्ति
  • ख) स्नेह-निर्झर बह गया है।
    रूपक (स्नेह-निर्झर)
  • ग) फूल-से कोमल हाथ।
    उपमा (फूल-से कोमल)
  • घ) संध्या-सुंदरी , परी-सी।
    उपमा (परी-सी),रूपक (संध्या-सुंदरी)
  • ङ) चारु चंद्र की चंचल किरणें ,
    खेल रही हैं जल-थल में।
    अनुप्रास(चारु चंद्र की चंचल)
  • च) मै जीवन-पथ पर हारा राही।
    रूपक (जीवन-पथ)
  • छ) यह देखिए अरविंद-से शिशुवृंद कैसे सो रहे।
    उपमा (अरविंद-से शिशुवृंद)
  • ज) झर पड़ता जीवन-डाली से, मै पतझड़ का-सा जीर्ण-पात।
    केवल,केवल जग-कानन में,लाने फिर से मधु का प्रभात।
    उपमा(पतझड़ का-सा जीर्ण-पात),रूपक(जीवन-डाली)
  • झ) चिरजीवौ जोरी जुरै,क्यों न स्नेह गंभीर।
    को घाटि ये वृषभानुजा , वे हलधर के वीर।
    श्लेष (एक वृषभानु की पुत्री हैं, दूसरे बलराम के भाई हैं। दूसरा अर्थ है: एक वृषभ (बैल) की अनुजा (बहन) हैं और दूसरे हलधर (बैल) के भाई हैं।)
  • ञ) कुसुमावलि-सी पुलकित महान
    सागर के उर पर नाच-नाच
    करती हैं लहरें मधुर गान।
    उपमा (कुसुमावलि-सी)
  • ट) मखमल के झूल पड़े हाथी-सा टीला
    बैठे किंशुक छत्र लगा बाँध पग-पीला
    चंवर सदॄश डोल रहे सरसों के सर अनंत
    आए महंत वसंत।
    रूपक(महंत वसंत),उपमा (हाथी-सा)
  • ठ) बादलों-से अनुचरों ने स्वर्ण की पोशाक धारी
    आ रही कवि की सवारी।
    उपमा(बादलों-से)

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