समास – सरल भाषा में

समास

समास किसे कहते है ?

  • समास = सम् (पास) + आस (रखना,बैठाना)
  • जब दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से एक नया संक्षिप्त शब्द बनाया जाता है तो उस प्रक्रिया को ‘समास’ कहते है। समासयुक्त पद को ‘समस्त पद’ कहते है। उसमे पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते है।

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समास की व्याख्या , भेद तथा उदाहरण

 

समास पहचानने का आसान तरीका –

अगर शब्द के दोनों पद तीसरे पद को संकेत करता है यानि कोई भगवान ,आदमी, चीज आदि को संकेत करता है तो वह बहुव्रीहि समास है।
उदाहरण : दशानन – दश(ten) आनन(face) है जिसके , यानि की रावण । यहाँ “दश” और “आनन” दोनों मिलाकर तीसरे पद “रावण” की और संकेत करता है।

अगर शब्द के दोनों पद के बीच में “और “, “एवं “,”तथा “,”या ” आदि जैसे शब्द लग सकते है तो वह द्वंद्व समास है।
उदाहरण : दाल-भात – दाल और भात ।

 

अगर शब्द के आगे यथा, आ , बे, हर ,प्रति आदि जैसे अव्यय है अथवा शब्द का पुनरावर्तन (एक ही शब्द दो बार ) आता है तो उसे अव्ययीभाव समास है।
उदाहरण : रातोंरात – रात ही रात में। यहाँ “रात ” का पुनरावर्तन हो रहा है।
उदाहरण : आजन्म – जन्म लेकर। यहाँ “आ” अव्यय है।

अगर शब्द के दोनों पद के बिच में कोई कारक (को,से,के लिए ,में,का,की आदि ) होता है तो वह तत्पुरुष समास है।
उदाहरण : समयानुसार- समय के अनुसार। “के ” कारक है।

अगर शब्द का पहला पद कोई संख्या दर्शाता है तो वह द्विगु समास है।
उदाहरण : त्रिलोक – त्रि (तीन) लोकों का समूह। यहाँ “त्रि” यानि “तीन” संख्या दर्शाता है।

अगर शब्द का पहला पद विशेषण है अथवा दो शब्द के बीच में “के समान” आता है तो वह कर्मधारय समास है।
उदाहरण : महावीर – महान(विशेषण) है जो वीर(विशेष्य)। यहाँ “महान ” शब्द “वीर ” का विशेषण है।
उदाहरण : प्राणप्रिय – प्राणों के समान प्रिय।

 

समास याद रखने का सरल तरीका
बहुव्रीहि तीसरे पद को संकेत
द्वंद्व और , एवं ,तथा ,या आदि
अव्ययीभाव यथा, आ , बे, हर ,प्रति आदि अथवा शब्द का पुनरावर्तन
तत्पुरुष कारक (को,से,के लिए ,में,का,की आदि )
द्विगु पहला पद कोई संख्या
कर्मधारय पहला पद विशेषण अथवा “के समान”

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 समास के उदाहरण 

 

 

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