Class-8 ch-1 भाषा और उसका क्षेत्र que-ans

भाषा और उसका क्षेत्र

अभ्यास

1 . भाषा से क्या अभिप्राय है ?
उतर – भाषा विचारों की अभिव्यक्ति का साधन है। भाषा शब्द की उतपत्ति ‘भाष्’ धातु से हुई है जिसका अर्थ है कहना व सुनना।

2 . लिपि किसे कहते हैं ?
उतर – भाषा को लिखने का ढंग लिपि कहलाता है।

3 . भाषा की अभिव्यक्ति किन दो रूपों में होती है ?
उतर – भाषा की अभिव्यक्ति दो रूपों में होती है – मौखिक और लिखित।

4 . उचित विकल्प पर सही का निशान लगाइए –

( क ) देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली भाषाएँ हैं –
i . हिंदी ii . संस्कृत iii . मराठी iv . तीनों

( ख ) पंजाबी की लिपि है –
i . गुरुमुखी ii . रोमन iii . देवनागरी iv . तीनों

( ग ) भारतीय संविधान में कुल कितनी भाषाओं को सम्मिलित किया गया है ?
i . 21 ii . 22 iii . 18 iv . 26

( घ ) भाषा को लिखने का ढंग क्या कहलाता है ?
i . लिपि ii . वर्ण iii . लिखित भाषा iv . मौखिक भाषा

( ङ ) फारसी लिपि लिखी जाती है –
i – दायीं से बायीं ओर ii . बायीं से दायीं ओर iii . बायीं ओर iv . दायीं ओर

( च ) मौखिक भाषा की आधारभूत इकाई है –
i . ध्वनि ii . वर्ण iii . लिपि iv . धातु

5 . दिए गए भारत के मानचित्र में ‘हिंदी भाषा’ के क्षेत्र को हरे रंग से दर्शाइए ।

उतर – राजस्थान ,मध्यप्रदेश ,उत्तर प्रदेश , बिहार ,झारखंड ,छत्तीसगढ़ ,नई दिल्ली ,उत्तराखंड ,हिमाचल प्रदेश ,हरियाणा (pg no 4 of textbook)

6 . शीशे के सामने खड़े होकर बोलने का अभ्यास करने से क्या लाभ होता है ?
उतर – शीशे के सामने खड़े होकर बोलने का अभ्यास करने से हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है। बातचीत करते समय हमारे चेहरे के हाव-भाव कैसे होने चाहिए उसका अभ्यास अच्छी तरह कर सकते है। लोगो के सामने या स्टेज पर बोलने का जो डर होता है वह दूर होता है।

7 . भाषा की आवश्यकता क्यों पड़ती है ? विस्तार से उत्तर दीजिए ।
उतर – भाषा विचारों को व्यक्त करने का एक प्रमुख साधन है। भाषा के द्वारा मन की बता बतलाई जाती है। मनुष्य को सभ्य और पूर्ण बनाने के लिए शिक्षा जरूरी है और सभी प्रकार की शिक्षा का माध्यम भाषा ही है। भाषा हमारे समाज के निर्माण, विकास, सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण साधन है।

8 . भाषा की विशेषताएँ विस्तार से बताइए ।
  • भाषा का आधार ध्वनि है । यद्यपि सार्थक भाषा वाक्यों से बनती है , वाक्य शब्दों तथा पदबंधों से बनते हैं । शब्दों का निर्माण मूल ध्वनियों से ही होता है ।
  • भाषा परिवर्तनशील है । आज के तकनीकी रूप से विकासशील जीवन में भाषा निरंतर परिवर्तित हो रही है । उदाहरण के लिए हिंदी भाषा में उर्दू , अंग्रेजी , फ्रेंच आदि अनेक भाषाओं की शब्दावली का मिश्रण हो रहा है ।
  • भाषा व्यवहार द्वारा सीखी जाती है । जब एक छोटा बच्चा अपने घर के बड़ों को भाषिक ध्वनियों का प्रयोग करते सुनता है तो वह भी उनका अनुकरण करने का प्रयास करता है और उच्चारण में समर्थ बनता है ।
  • भाषा की भौगोलिक सीमा होती है । एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र की भाषा में भेद होना अनिवार्य है । ‘ चार कोस पर पानी बदले आठ कोस पर बानी ‘ वाली कहावत में इसी तथ्य को स्पष्ट किया गया है ।
  • भाषा समाजिक वस्तु है । उसका आरंभिक पाठ पढ़ाने वाली माँ होती है पर जिस भाषा को वह सिखाती है वह समाज की ही संपत्ति होती है जिसकी शिक्षा स्वयं उसने अपनी माँ से ली होती है ।
  • भाषा अर्जित वस्तु है । इसे मनुष्य उस समाज और वातावरण से अर्जित करता है जिसमें वह रहता है क्योंकि जन्म के समय वह शारीरिक अंग ( हाथ – पैर आदि ) लेकर तो उत्पन्न होता है पर भाषा लेकर नहीं ।
9 . हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालिए ।
  • भारत के सर्वाधिक क्षेत्रों में बोली जाने के कारण हिंदी को राष्ट्रभाषा का स्थान प्राप्त है और इसी कारण 14 सितंबर , 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में भी स्वीकार किया गया है ।
  • स्वतंत्रता संग्राम में सभी देशवासियों को एकजुट करने में हिंदी भाषा का मुख्य योगदान रहा है । देश के लगभग सभी राष्ट्रीय व सांस्कृतिक आंदोलन इसी भाषा को आधार बनाकर चले हैं ।
  • हिंदी का शब्द – भंडार बहुत समृद्ध है । यह अत्यंत वैज्ञानिक भाषा है । इसमें जैसा बोला जाता है वैसा ही लिखा जाता है । हर विधा का साहित्य हिंदी भाषा में लिखा गया है ।
  • देश की सांस्कृतिक उपलब्धियों में हिंदी का विशेष महत्व है । विदेशी धरती पर सर्वप्रथम स्वामी विवेकानंद ने ‘ शिकागो ‘ में हिंदी भाषा में अपना भाषण दिया था और भारतीय संस्कृति व सभ्यता की महत्ता पर प्रकाश डाला था ।
10 . ‘ जो काम तलवार नहीं कर सकती वह काम लेखनी कर सकती है ।’ इस कथन को स्पष्ट करते हुए भाषा के लिखित रूप के महत्व पर प्रकाश डालिए।
  • लेखनी से किसी भी तरह की क्रांति लाई जा सकती है, इतिहास गवाह है कि “लेखनी”ने बड़ी बड़ी क्रांतियों को जन्म दिया है।
  • लेखनी वो मजबूत हथियार की तरह है, जिससे सामने वाले दुश्मन को हम परास्त कर सकते हैं।
  • तलवार जहाँ चंद दुश्मनों को ही मार भगा सकती है, वहीं “लेखनी” हजारों लाखों क्या करोड़ों शत्रुओं को परास्त करने की क्षमता रखती है।
  • कलम या लेखनी अगर चाहे तो किसी को लोगो की नजर में महान बना दे और चाहे तो किसी को शैतान बना दे। बहुत ताकत होता है एक लेखक की लेखनी में।
  • लेखनी से लोगो में क्रांति लायी जा सकती है। सोयी हुई देशभक्ति और स्वाभिमान को जगाया जा सकता है।
  • अगर आप एक देशभक्ति वाली कविता पढ़ते है तो देशभक्ति से ओतप्रोत हो जाते हैं. आप ऐसी स्थिति में आ जाते हैं कि अगर सीमा पे लड़ने की भी आवश्यकता पड़े तो आप चले जायेंगे. इसका मतलब ये है कि लेखनी में इतनी ताकत है कि आपके अंदर क्रांति जग सके,
  • कार्ल मार्क्स ने लेखनी के माध्यम से रूस की पूंजीवादी सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।
  • आज मीडिया में इतना शक्ति है कि वो अच्छे अच्छे लोगों को भी डरा के रखते हैं. ये लेखनी की शक्ति नहीं तो क्या है?
  • अपने कलम के बल पर आप दुनिया बदल सकते है और सोशल मीडिया तो एक अच्छा प्लेटफॉर्म भी है।

11 . बेन जॉनसन ने कहा है कि , ” बोलने से ही मनुष्य के रूप का साक्षात्कार होता है । ” उनके इस कथन का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए ।
उतर – बातचीत मनुष्य के गुण और दोष को प्रकट करता है। किसी व्यक्ति से बातचीत करके ही उसकी अच्छी या बुरी बातो के बारे में पता लगाया जा सकता है। बात करने से ही मनुष्य की असली पहचान जानी जा सकती है। इसलिए बेन जॉनसन ने कहा है कि , ” बोलने से ही मनुष्य के रूप का साक्षात्कार होता है । ”

12 . ‘ भाषा बिना दाम के लोगों को खरीद लेती है । ‘ इस कथन से क्या अभिप्राय है ?
उतर – भाषा नहीं होती तो हमारा जीवन बहुत मुश्किल होता | भाषा के बिना जग सुनसान है। भाषा के माध्यम से हम सब की बाते समझ सकते है | यदि कोई भाषा नहीं होती , तो भावनाओं और विचारों को व्यक्त करना बहुत मुश्किल हो जाता। अच्छी भाषा के जरिए आपस में लोगों के बीच अच्छे संबंध बनते है | भाषा से ही हम अनजान लोगो से भी जान-पहचान हो जाती है। भाषा से हम लोगो के नजदीक आ सकते है और अच्छे दोस्त भी बन सकते है। भाषा सबको आपस में जोड़ कर रखती है | भाषा को बोलने के लिए कोई दाम यानि पैसे नहीं लगते है। इसलिए कहा जाता है ‘ भाषा बिना दाम के लोगों को खरीद लेती है । ‘

13 . भाषा अर्जन के लिए समाज अथवा निर्जन स्थान में से किसका होना अनिवार्य है और क्यों ?
उतर – भाषा अर्जन यानि ऐसी प्रक्रिया जिसके द्वारा मानव भाषा को ग्रहण करने एवं समझने की क्षमता प्राप्त करता है तथा बातचीत करने के लिये शब्दों एवं वाक्यों का प्रयोग करता है। भाषा अर्जन करने के लिए सामने भी कोई व्यक्ति मौजूद होनी चाहिए तभी हम भाषा की आप ले क्र सकते है। निर्जन स्थान में हमारी भाषा समझने और ग्रहण करने के लिए कोई नहीं होता। वहाँ शब्द या वाक्य प्रयोग से किसी से बात भी नहीं कर सकते। इसलिए भाषा अर्जन के लिए समाज का होना अनिवार्य है।

14 . भाषा जन्मजात वस्तु है अथवा अर्जित वस्तु ? अपने चयन का कारण बताइए ।
उतर – भाषा अर्जित वस्तु है। इसे मनुष्य उस समाज और वातावरण से अर्जित करता है जिसमे वह रहता है क्योंकि जन्म के समय वह शारीरिक अंग लेकर तो उतपन्न होता है पर भाषा लेकर नहीं।

15 . नीचे भाषिक संचार के अलग – अलग माध्यम दिए गए हैं । प्रत्येक माध्यम की एक – एक विशेषता लिखिए और बताइए ये भाषा के किस प्रकार से संबंधित है – माखिक प्रकार से , लिखित प्रकार से अथवा दोनों से।
संचार माध्यम भाषिक प्रकार विशेषता
कंप्यूटर दोनों प्रकार किसी भी तरह के डॉक्युमेंट बना सकते है और इ-मेल भी कर सकते है।
मोबाइल दोनों प्रकार दुनिया के किसी भी कोने में रहते आदमी से मौखिक और लिखित दोनों तरीके से बात कर सकते है।
फोन मौखिक प्रकार मौखिक रूप से किसी से भी बात कर सकते है।
फैक्स मशीन लिखित प्रकार यह किसी भी डॉक्यूमेंट को एक सेकंड में भेज सकता है और प्राप्त कर सकता है।
पत्र लिखित प्रकार अपने अनुभव , सोच, मनोभाव आदि लिखित स्वरूप में किसी तक पहुँचा सकते है।
टी.वी. मौखिक प्रकार पुरी दुनिया की ताज़ा खबरें देता है।
16 . नीचे दिया अपठित गद्याश पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
श्रवण भाषा विचारों की अभिव्यक्ति का , विचार – विनिमय का व संप्रेषण का सशक्त माध्यम है । भाषा का आधार ध्वनि है । ध्वनियाँ कई तरह की होती हैं – दरवाजा खटखटाने की , लहरों के उठने – गिरने की , पदार्थों के टकराने को आदि । इसके अतिरिक्त पशु – पक्षियों के कंठ से भी ध्वनियाँ निकलती हैं जैसे गाय के रँभाने की , घोड़े के हिनहिनाने की आदि । लेकिन ये ध्वनियाँ हमारे लिए अर्थहीन होती हैं , इसलिए ये केवल ध्वनियाँ हैं , भाषा नहीं । जब हम भाषा की बात करते हैं तो हमारा अभिप्राय उन ध्वनियों से होता है जो मानव – कंठ से निकलती हैं , जिनके उच्चारण में कंठ , जिह्वा , नासिका , होंठ आदि का प्रयोग होता है । इन ध्वनियों का एक निश्चित अर्थ होता है और भाव – विचार की अभिव्यक्ति में सहायता होती है । तरह – तरह की ध्वनियों को एक साथ पिरोकर भाव को स्पष्ट कर देना ही भाषा का काम है । प्रायः मनुष्य भी चोट लगने पर उफ् कह उठता है । अगर मनुष्य उह , आह , वाह , उफ् के सिवाय कुछ और बोल नहीं पाता तो हम नहीं कह पाते की उसकी कोई भाषा है । संक्षेप में कह सकते हैं कि मानव – मुख से निकली सार्थक ध्वनियाँ ही भाषा का रूप धारण करती हैं ।

( क ) भाषा का आधार क्या है ?
भाषा का आधार ध्वनि है ।

( ख ) क्या पशु – पक्षियों की कोई भाषा होती है ?
पशु – पक्षियों की कोई भाषा नहीं होती है।

( ग ) जब हम भाषा की बात करते हैं तो हमारा अभिप्राय किन ध्वनियों से होता है ?
जब हम भाषा की बात करते हैं तो हमारा अभिप्राय उन ध्वनियों से होता है जो मानव – कंठ से निकलती हैं , जिनके उच्चारण में कंठ , जिह्वा , नासिका , होंठ आदि का प्रयोग होता है ।

( घ ) भाषा क्या काम करती है ?
भाषा तरह – तरह की ध्वनियों को एक साथ पिरोकर भाव को स्पष्ट कर देती है ।

( ङ) उपर्यक्त गद्यांश के लिए उचित शीर्षक लिखिए ।
उपर्यक्त गद्यांश के लिए उचित शीर्षक – “भाषा”

 

 

 

 

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *