Class-7 Ch-1 भाषा,वर्ण और वर्तनी

भाषा , वर्ग और वर्तनी

अभ्यास

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

1 ‘ मानक भाषा ‘ से क्या तात्पर्य है ? स्पष्ट कीजिए ।
उतर  – जब हम समाज में औपचारिक रूप से व्यवहार करते है अर्थात कहीं भाषण देते है,पढ़ाते है,टीवी पर बोलते है ,तो हम एक विशेष स्तर की भाषा का प्रयोग करते है। यह भाषा कहलाती है। यह सभ्य और पढ़े-लिखे लोगों की भाषा मानी जाती है।

2. हमारे देश की ‘ संपर्क भाषा ‘ क्या है और क्यों है ? विस्तार से बताइए ।
उतर  – भारत एक विशाल देश है, जिसमें अनेक भाषाओं और बोलियों को बोलने वाले लोग रहते है। इन सभी भाषाओ समझना असम्भव है ,इसलिए एक ऐसी सामान्य भाषा की आवश्यकता है ,जो सभी लोग समझ सके। हमारे देश में यह भाषा हिंदी है। इस भाषा से हम देश के किसी भी कोने में रहने वाले व्यक्ति से संपर्क कर सकते है।

3 . व्यंजन – भेदों के नाम बताइए ।
उतर  – स्पर्श व्यंजन ,अंतस्थ व्यंजन , उष्म व्यंजन

4 . भाषा की सबसे छोटी इकाई क्या कहलाती है ? इसके दो भेदों के नाम बताइए ।
उतर  – भाषा की सबसे छोटी इकाई वर्ण है। इसके दो भेद : स्वर और व्यंजन

5 . स्वर व व्यंजन में क्या अंतर है ? स्पष्ट कीजिए ।
उतर  – स्वर का उच्चारण बिना किसी अन्य ध्वनि की सहायता के किया जाता है। हिंदी में 11 स्वर है।
व्यंजन का स्वतंत्र रूप से उच्चारण नहीं हो सकता और जिनके बोलने के लिए हमे स्वरों की सहायता लेनी पड़ती है। हिंदी में 33 व्यंजन है।

6 . ह्रस्व व दीर्घ स्वरों का अंतर स्पष्ट कीजिए और दिए गए स्वरों में से दीर्घ स्वरों को छाँटिए ।
इ , आ , ओ , उ , ऐ , औ , ई , अ , ऊ
उतर  – ह्रस्व स्वर – इ , उ ,अ
दीर्घ स्वर – आ , ओ , ऐ , औ , ई , ऊ

7 . अल्पप्राण और महाप्राण का अंतर उदाहरण देकर समझाइए ।
उतर  – जिनमें प्राण-शक्ति अर्थात श्वास कम चाहिए ,उन्हें ‘अल्पप्राण व्यंजन’ कहा जाता है। हर वर्ग के प्रथम,तृतीय और पंचम व्यंजन अल्पप्राण हैं – क्,ग्,ङ्।
जिनमें प्राण-शक्ति अर्थात श्वास अधिक चाहिए ,उन्हें ‘महाप्राण व्यंजन’ कहा जाता है। हर वर्ग के द्वितीय व चतुर्थ व्यंजन अल्पप्राण हैं – ख्,घ्।

8. निम्नलिखित वाक्यों में सही कथनों पर सही (✔) का चिह्न लगाइए ।
( क ) हिंदी में स्वरों की संख्या ग्यारह है । ✔
( ख ) स्वरों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है । ✔
( ग ) श्वास – वायु की मात्रा के आधार पर व्यंजनों के दो भेद किए गए हैं । ✔
( घ ) जिन व्यंजनों का उच्चारण करते समय प्राण – शक्ति अर्थात श्वास अधिक चाहिए , उन्हें अल्पप्राण व्यंजन कहा जाता है । X
( ङ ) जिन व्यंजनों का उच्चारण करते समय प्राण – शक्ति अर्थात श्वास कम चाहिए , उन्हें महाप्राण व्यंजन कहा जाता है । X

9. निम्नलिखित वाक्यों की पूर्ति उचित शब्दों द्वारा कीजिए ।
( क ) दीर्घ स्वर 7 हैं ।
( ख ) अ , इ , उ ह्रस्व स्वर हैं ।
( ग ) हिंदी में 33 व्यंजन हैं ।
( घ ) ख , घ महाप्राण व्यंजन हैं ।

10. वर्ण पढ़िए और सही शीर्षक तक रेखा खींचिए ।

उतर  – अल्पप्राण : क् , ग् , च् , ज् ,ङ् ,त् , द् , प् , य , ल्
महाप्राण : ख् ,घ् ,ठ , ढ ,थ् , भ्

11. वर्तनी की अशुद्धियों के दो कारण बताइए ।
उतर  – वर्तनी की अशुद्धियों के दो कारण है : १) गलत बोलने से २) गलत लिखने से

12. ह्रस्व व दीर्घ और अल्पप्राण व महाप्राण की त्रुटियों के दो – दो उदाहरण दीजिए ।
उतर  – ह्रस्व व दीर्घ की त्रुटियों के उदाहरण : साधू -साधु , अहार – आहार
अल्पप्राण व महाप्राण की त्रुटियों के उदाहरण : शरन – शरण , रिण – ऋण

13 . नीचे दी गई अशुद्धियों को शुद्ध कीजिए –
शक्ती – शक्ति
भक्ती – भक्ति
सुरज – सूरज
किरपा – कृपा
आयू – आयु
यग्य – यज्ञ
सढ़क – सड़क
मरन – मरण
मिरग – मृग
कढ़वा – कड़वा
रिषि – ऋषि

14 . नीचे भाषा के महत्व पर आधारित अपठित गद्यांश दिया गया है । अपठित शब्द का अर्थ है , जो इस समय आपने अपनी निर्धारित पाठ्य – पुस्तक में नहीं पढ़ा । पिछली कक्षा में आप अपठित गद्यांशों के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देने का अभ्यास कर चुके हैं । उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए दिए गए अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

” किसी कवि ने कहा है – कौआ किसका धन हर लेता , कोयल किसको दे देती है । केवल मीठे बोल सुनाकर , बस में सबको कर लेती है । कवि की वात पूर्णतः सत्य है । मधुर वचन वास्तव में एक ऐसी औषधि के समान हैं , जिससे सभी को वश में किया जा सकता है । जब हम मधुर वाणी सुनते हैं , तो हमारा मन प्रसन्न हो उठता है । संत कबीरदास ने भी कहा है कि व्यक्ति को ऐसी वाणी बोलनी चाहिए , जो न केवल उसे स्वयं , बल्कि दूसरों के हृदय को भी आनंद से भर दे । वस्तुतः प्रेमपूर्वक कहे गए मधुर वचनों को सुनते ही हम वक्ता की हर बात मानने के लिए तैयार हो जाते हैं । व्यक्ति के ऐन का एक आई रिसर्च इनीशिएटिव एजुकेशन बयालिटंग

बोलने मात्र से ही उसके व्यक्तित्व के विषय में पता चल जाता है । सज्जन हमेशा मधुर वाणी का प्रयोग करते हैं , जबकि दुर्जनों की वाणी कर्कश होती है । मधुर वाणी से रूठे हुए प्रियजनों को मनाया जा सकता है , बिगड़े कामों को बनाया जा सकता है , शत्रुओं को मित्र बनाया जा सकता है तथा सभी को मंत्र मुग्ध किया जा सकता है । एक वाक्य में कहें तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं । इसके विपरीत , कड़वे वचनों से मित्र भी शत्रु बन जाते हैं । व्यक्ति को कुछ बोलने से पहले अपने वचनों को हृदय के तराजू पर तोल लेना चाहिए अर्थात भली – भांति मन में सोच – विचार करने के पश्चात ही बोलना चाहिए । शरीर पर लगे घाव का दर्द तो फिर भी कुछ समय बाद ठीक हो जाता है , किंतु किसी की अनजाने में भी कही गई कड़वी बात यदि एक बार मन में प्रवेश कर गई , तो वह रह – रहकर कष्ट पहुँचाती रहती है ।

द्रोपदी द्वारा कहा गया एक कटु वाक्य “अंघों के घर अंधे ही पैदा होते हैं । ” दुर्योधन के हृदय में इस प्रकार जाकर बैठ गया कि महाभारत के युद्ध का कारण बना । अतः व्यक्ति को सदैव सोच – समझकर बोलना चाहिए । जिसने भी अपनी वाणी को वश में करके मधुर वचनों का प्रयोग करना सीख लिया , मानो उसने सब कुछ पा लिया । आजकल बड़े – बड़े नेता भी वाणी के बल पर जनता को अपने पक्ष में कर लेते हैं । मधुर वचन में वह आकर्षण है , जो विना रस्सी के ही सभी को बाँध लेता है अर्थात श्रोता के मन – मस्तिष्क को वश में कर लेता है । ”

( क ) सज्जन और दुर्जन प्राणियों की भाषा में क्या अंतर होता है ?
उतर  – सज्जन हमेशा मधुर वाणी का प्रयोग करते हैं , जबकि दुर्जनों की वाणी कर्कश होती है ।

( ख ) मधुर वाणी क्या – क्या कार्य कर सकती है ?
उतर  – मधुर वाणी से रूठे हुए प्रियजनों को मनाया जा सकता है , बिगड़े कामों को बनाया जा सकता है , शत्रुओं को मित्र बनाया जा सकता है तथा सभी को मंत्र मुग्ध किया जा सकता है ।

( ग ) महाभारत के युद्ध का मुख्य कारण क्या था ?
उतर  – द्रोपदी द्वारा कहा गया एक कटु वाक्य “अंघों के घर अंधे ही पैदा होते हैं । ” दुर्योधन के हृदय में इस प्रकार जाकर बैठ गया कि महाभारत के युद्ध का कारण बना ।

( घ ) व्यक्ति को बोलने से पहले अपने वचनों को हृदय के तराजू पर क्यों तौल लेना चाहिए ?
उतर  – व्यक्ति को कुछ बोलने से पहले अपने वचनों को हृदय के तराजू पर तोल लेना चाहिए,क्योंकि शरीर पर लगे घाव का दर्द तो फिर भी कुछ समय बाद ठीक हो जाता है , किंतु किसी की अनजाने में भी कही गई कड़वी बात यदि एक बार मन में प्रवेश कर गई , तो वह रह – रहकर कष्ट पहुँचाती रहती है ।

( ङ ) उपर्युक्त गद्यांश को उपयुक्त शीर्षक दीजिए ।
उतर  – “वाणी : मित्र या शत्रु “

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